मोदी की बुलेट ट्रेन के सामने खड़ी हैं ये 4 चुनौतियां!

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मोदी की बुलेट ट्रेन के सामने खड़ी हैं ये 4 चुनौतियां!

मोदी की बुलेट ट्रेन के सामने खड़ी हैं ये 4 चुनौतियां!

News18Hindi Updated: September 14, 2017, 11:24 AM IST
महज 2 घंटे में मुंबई से अहमदाबाद…जल्द ये सपना अब हकीकत बनने की ओर है. जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन प्रॉजेक्ट की नींव रखने जा रहे हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स बुलेट ट्रेन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन अधिग्रहण को बता रहे है. साथ ही, बुलेट ट्रेन को भारत के हिसाब से बनाना भी बड़ा टास्क होगा. इसके अलावा आगे चलकर इसका विस्तार किस तरह से होगा. यह भी बड़ा चैलेंज रहने वाला है.

पहली चुनौती
जानकारों का कहना है कि बुलेट ट्रेन परियोजना को समय पर पूरा करने में सबसे बड़ी बाधा भूमि अधिग्रहण को लेकर खड़ी होगी. इस प्रोजेक्ट के लिए शुरुआत में 1650 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की जरूरत बताई गई थी. लेकिन राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल निगम ने इस प्रोजेक्ट के प्लान में एलिवेटेड हिस्से को भी शामिल कर लिया जिससे जमीन की जरूरत घट गई. संशोधित अनुमान 825 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का है. परियोजना की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के आठ जिलों के 163 गांव, महाराष्ट्र के तीन जिलों के 44 गांव और दादरा नागर हवेली के भी कुछ इलाकों में जमीन का अधिग्रहण करने की जरूरत होगी. इससे करीब 2800 परिवारों के प्रभावित होने का अंदेशा है.

दूसरी चुनौतीइंडस्ट्री जगत का कहना है कि मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट के पूर्ण होने की समयसीमा को एक साल पहले कर दिए जाने से भूमि अधिग्रहण के मोर्चे पर सरकार की चुनौतियां और भी अधिक बढ़ जाएंगी. इस प्रोजेक्ट के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होगी जिसमें से 88,000 करोड़ रुपए जापान आसान शर्तों पर कर्ज के रूप में दे रहा है. जापान महज 0.01 फीसदी की मामूली दर पर भारत को यह कर्ज दे रहा है. लेकिन इसमें पेच यह है कि जापान इस कर्ज की राशि चरणबद्ध तरीके से जारी करेगा और उसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रगति को आधार माना जाएगा.

तीसरी चुनौती
एक बार हाई स्पीड ट्रेन भारत में चलने लगेगी, तब देश में इसके विस्तार की मांग बढ़ जाएगी. यह सबसे बड़ी चुनौती है. साथ ही, कब और कहां इसका विस्तार होगा, क्योंकि इस प्रोजेक्ट को प्रॉफिटेबल बनाना सबसे बड़ा चैलेंज है.

चौथी चुनौती
हाईस्पीड ट्रेन के लिए सबसे ज्यादा जरुरी डिजाइन, निर्माण और संचालन के लिए बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियरों और प्रबंधकों को प्रशिक्षित करना महत्वपूर्ण होगा. जिसमें कड़े सिक्युरिटी स्टैंडर्ड भी शामिल हैं. यह भी बेहद महत्वपूर्ण है कि जापान की बुलेट ट्रेन से भारत का मामला बिल्कुल अलग है. हालांकि, आईआईएम बैंगलोर भारत-जापान अध्ययन केन्द्र की स्थापना कर रहा है जिसमें बुनियादी ढांचे के लिए प्रबंधन सहित भारत-जापान परस्पर समझ और पूरक कौशल निर्माण में सुधार के मिशन शामिल हैं.

First published: September 14, 2017

Source | hindinews18

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