पूर्वांचल के गांधी के सम्मान में बीआरडी को तो मिले सुविधायें

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पूणे से आकर पूरा जीवन पूर्वांचल को समर्पित करने वाले बाबा राघव दास के नाम से गोरखपुर मंडल में कई संस्थान खुले लेकिन जिम्मेदार इस संस्थानों को लेकर भी संजीदा नहीं हैं। दूसरों को जीवन देने के लिए स्थापित गोरखपुर का बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज फिलवक्त खुद ऑक्सीजन पर नजर आता है। बाबा राघव दास के नाम से खुले शैक्षणिक संस्थानों का भी बुरा हाल है। 

हमारे पितु पुरुष
बाबा राघवदास के नाम से स्थापित संस्थानों को लेकर भी संजीदा नहीं हुक्मरात

देवरिया के बहरज के पार्क में उपेक्षित है बाबा राघवदास की प्रतिमा 

पूणे से आकर बसे बाबा राघवदास ने पूरा जीवन पूर्वांचल को कर दिया समर्पित

भक्त नरसी मेहता के शब्द ‘वैष्णव जन तो तेणे कहिए जो पीड़ पराई जाणे रे, पर दुखे उपकार करे तोए मन अभिमान न आड़े रे’ सदैव गुनगुनाने वाले परमहंस बाबा राघवदास का जन्म 12 दिसम्बर 1896 को महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा पर स्थित बेलगांव तहसील के पच्छापुर गांव में चितपावन बाह्मण के घर में हुआ था। महाराष्ट्र से चलकर गुरू की खोज में बरहज आश्रम आए और अनंत महाप्रभु के शिष्य बन गए। 1916 में महाप्रभु के स्वर्गारोहण के पश्चात उनकी गुफा में बैठकर तप करने लगे। बाद में महात्मा गांधी के आह्वान पर देश की स्वतंत्रता के लिए अपने को समर्पित कर दिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पूर्वांचल के गांधी व महान संत बाबा राघवदास के लिए कहा था कि ‘बाबा राघवदास जैसे थोड़े से संत हमें मिल जाए तो भारत का स्वराज बाएं हाथ का खेल बन जाए।’ संतों में राजनीतिज्ञ और राजनीतिज्ञों में संत महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबा राघवदास का जीवन गीता मूर्तिमान व युग सक्रिय दिखाई देता है। राष्ट्रीय विचारों के इस साधू ने स्वतंत्रता आंदोलन में जो अलख जगाई वह क्रांतिकारियों के लिए एक प्रेरणाश्रोत बना। नंगे पांव, नंगे सिर, खादी की मोटी धोती, एक हल्की चादर, खस्खसी दाढ़ी, माथे पर पसीना, आंखों में गहरी करूणा और होठों पर उभर कर भी न उभर पा रही मुस्कान यही पहचान थी पूर्वांचल के गांधी बाबा राघवदास की।
स्वच्छता अभियान के अग्रदूत थे बाबा राघव दास

राष्ट्रपिता महात्मा गॉधी के स्वच्छता अभियान से बाबा राघव दास काफी प्रभावित थे। उन्होंने कूड़ा-कचरा व मैला साफ करते हुए समाज को नया आयाम देने का कार्य किया। फिलहाल चाहे गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल की बात हो या बरहज में उनके नाम से बने पार्क की। सभी स्थानों पर गंदगी का साम्राज्य ही नजर आता है।
कोल्हू पर टैक्स के विरोध में दे दिया विधानसभा से इस्तीफा 

वर्ष 1948 में बाबा राघवदास उत्तर प्रदेश के फैजाबाद से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विधानसभा का चुनाव लड़े। प्रख्यात समाजवादी चिंतक आचार्य नरेन्द्रदेव को हराकर प्रदेश की विधानसभा में पहुॅचे। लेकिन जब कोल्हू पर सरकार ने टैक्स लगाया तो इसका विरोध करते हुए वह विधान सभा सदस्य से इस्तीफा दे दिया और अपना सारा समय देश व समाज सेवा में लगा दिया। 14 सितम्बर 1952 को संत विनोवा ने जब उत्तर प्रदेश छोड़ा तो सारा भार बाबा राघवदास के कंधों पर आ गया। 9 अप्रैल 1955 को बरहज आश्रम छोड़ भूदान पदयात्रा में शरीक हो गए तथा 15 हजार मील की पैदल यात्रा की। इस सहभागिता से प्रसन्न होकर विनोबा ने कहा ‘कामना मेरी सफलता बाबा राघवदास की।’ 15 जनवरी 1958 को मध्यप्रदेश के शिवनी में ‘चरैवेति-चरैवेति’ का यह महान प्रयोगकर्मी महाप्रयाण को निकल पड़ा।
उपेक्षित है पार्क में स्थापित बाबा राघवदास की प्रतिमा 

बाबा राघवदास की प्रतिमा गौरा रोड जा रही सड़क किनारे सटे उत्तर बाबा राघवदास पार्क में स्थापित है। वर्ष-1969 में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. विश्वनाथ त्रिपाठी ने बाबा जी की प्रतिमा को प्रथम बार स्थापित कराया था। प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। पार्क में स्थापित प्रतिमा का रख-रखाव आज ठीक नहीं होने से प्रतिमा उपेक्षित हो गई है। जिस महान संत ने बरहज की गंदगी खुद अपने हाथों से साफ किया था, आज उन्हीं की प्रतिमा के सामने गंदगी का अंबार है। पास में मांस की दुकानें खुली है। प्रतिमा स्थल जगह-जगह खंडित हो गया है। बाबा राघवदास के सम्पर्क में रहे कुछ प्रबुद्धजनों से रायशुमारी की गई तो उपेक्षित हो रही प्रतिमा का दर्द खुलकर सामने आया।

साफ-सफाई के दूत को सम्मान देना भूल गए जिम्मेदार

‘‘वैष्णव संत रहे बाबा राघवदास आजीवन जनसेवा करते रहे। ऐसे संत के प्रतिमा का सम्मान करने के लिए समाज में जागरूकता फैलानी होगी। पार्क में स्थापित प्रतिमा का रख-रखाव ठीक ढंग से करने के लिए सबको आगे आने की आवश्यकता है। जागरूक वर्ग को आगे आते हुए पार्क में गंदगी फैला रहे लोग को रोकना होगा। ऐसे कार्य से ही एक महान संत का सम्मान होगा।’’
आंजनेयदास महाराज, पीठाधीश्वर-आश्रम बरहज

‘‘कक्षा आठ में शिक्षा ग्रहण करने एसके इंटर कॉलेज आश्रम बरहज में आया तो बाबा राघवदास से सम्पर्क हुआ। बाबा जी के सानिध्य में राघवमंदिर परिसर में होने वाली विशेष प्रार्थना में भाग लेता रहा। खादी वस्त्र धारण करने के लिए बाबा राघवदास ने सलाह दी थी। जिसका अनुपालन आज भी करता चला आ रहा हूं। पार्क में स्थापित उनकी प्रतिमा का रख-रखाव समुचित ढंग से करने के लिए जागरूकता जरूरी है।’’ 
राजनारायण पाठक, पूर्व प्राचार्य 

‘‘कक्षा पांचवी में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान देवरिया स्थित मेरे निज निवास पहुंचे बाबा राघवदास से आशीर्वाद प्राप्त करने का पहला मौका मिला था। बाबा राघवदास अपने शिष्य सत्यव्रत महाराज को साथ लेकर आए थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पिता पं. विश्वनाथ त्रिपाठी पालिका अध्यक्ष थे तो उन्होंने ही बाबा जी प्रतिमा को सर्वप्रथम बरहज के पार्क में स्थापित कराते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अनावरण कराया था। प्रतिमा की सुरक्षा के लिए प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।’’
एडवोकेट वीरेन्द्र त्रिपाठी, प्रबंधक-पं. विश्वनाथ त्रिपाठी शिक्षण संस्थान

‘‘बरहज के प्रसिद्ध बाबा राघवदास पार्क में स्थापित बाबा राघवदास जैसी विभूति की प्रतिमा का वर्तमान परिवेश में काफी अनादर हो रहा है। बरहज के इस इकलौते पार्क में पूर्व में सभाएं होती थी। पार्क में स्थापित बाबा राघवदास की प्रतिमा के ईद-गिर्द वर्तमान समय में मांस व मछली की बिक्री होना परम दुर्भाग्यपूर्ण है। जनप्रतिनिधियों व प्रबुद्धजनों को पार्क में स्थापित प्रतिमा का समुचित रख रखाव करने के लिए खुलकर आगे आना होगा।’’

डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय, ललित निबंधकार 

Source | livehindustan

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