सरहद के बाद अब बनारस के गांव संभालेंगे फौजी| Navbharattimes

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विकास पाठक, वाराणसी

सेना के जवान जान की बाजी लगाकर देश की रक्षा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। इनमें कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने सरहद की रक्षा में अपनी जवानी बिता दी और अब रिटायर्ड होने के बाद गांव का रुख किया है।

पूर्व फौजियों की टोली बनारस के गांवों की तस्वीर बदलने में जुट रही है। इसमें उन्हें साथ मिला है छात्रों की संस्था ‘होप वेलफेयर ट्रस्ट’ के ग्रीन ग्रुप का। अब रिटायर्ड फौजी गांव के लोगों को साफ-सफाई से लेकर जुआ-नशा, दहेज और महिला प्रताड़ना से दूर रहने का पाठ पढ़ाएंगे। साथ ही अपने तजुर्बे, कठिन हालात में रहने की सीख, कर्तव्य-निष्ठा और गांव के नौजवानों को फौज में जाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और उन्हें ट्रेनिंग देंगे।

बनारस के ग्रामीण इलाकों में जुआ और नशा रोकने की पहल बीएचयू, काशी विद्यापीठ, जेएनयू और डीयू के छात्र-छात्राओं ने की है। कैंपस से निकलकर छात्रों की टोलियों ने महिलाओं के ग्रीन ग्रुप के जरिए जुआड़ियों और नशेड़ियों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है

बनारस शहर से दूर देउरा गांव में रविवार को रिटायर्ड फौजी सुधीर राय की अगुआई में जुटे करीब 24 फौजियों ने ग्रीन ग्रुप की महिलाओं की चौपाल में अपने अनुभव साझा किए। इसके बाद फौजियों ने ग्रीन ग्रुप की महिलाओं के साथ काम करने का ऐलान किया।

सेना के जवान जान की बाजी लगाकर देश की रक्षा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। इनमें कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने सरहद की रक्षा में अपनी जवानी बिता दी और अब रिटायर्ड होने के बाद गांव का रुख किया है।सेना के जवान जान की बाजी लगाकर देश की रक्षा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। इनमें कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने सरहद की रक्षा में अपनी जवानी बिता दी और अब रिटायर्ड होने के बाद गांव का रुख किया है।

Source:Navbharattimes

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