पूर्वजों को पिंडदान देने और तर्पण के लिए गया में जुटे तीर्थयात्री

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पूर्वजों को पिंडदान देने और तर्पण के लिए गया में जुटे तीर्थयात्री

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Arun Chaurasia | ETV Bihar/Jharkhand Updated: September 7, 2017, 12:36 PM IST
पितृपक्ष महासंगम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से तीर्थयात्री पिंडदान और तर्पण करने गयाजी आये हुए हैं. इन सभी तीर्थयात्रियों का एक ही मकसद पूर्वजों के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करना है. देश की बहुलतावादी संस्कृति की झलक यहां मिल रही है. इनके तौर-तरीकों और वेश-भूषा अलग-अलग हैं.

पितृपक्ष महासंगम में लाखों तीर्थयात्री अपने पूर्वजों को लिए पिंडदान और तर्पण कर रहें हैं. इन तीर्थयात्रियों में अलग-अलग भाषा, वेश-भूषा एवं संस्कृति की झलक दिखाई पड़ रही है. कोई गेरूआ रंग का वस्त्र धारण किया हुआ है तो कोई धोती या अन्य कपड़ा. पिंडदान भी कोई जौ के आटा से कर रहा है त कोई चावल या बालू से. यहां आये तीर्थयात्रियों को एक दूसरे की संस्कृति भी देखने समझने को मिलता है.

आमतौर पुर सानतन धर्म में मृत्यु के पश्चात श्मशान या श्राद्धकर्म में महिलाओं को दूर रखने की परमपरा है, लेकिन गया में श्राद्ध की ऐसी परंपरा है जिसमें पति-पत्नी के एक साथ पिंडदान और तर्पण करते हैं. पितरों को मोक्ष यानि स्वर्ग की प्राप्ति होती है.

यहां महिलाओं को पुरूष के बराबर सम्मान दिया गया है. वहीं तीर्थयात्रियों के इस धार्मिक कार्य में सुरक्षा का दायित्व संभालने वाले पुलिसकर्मी भी ड्युटी निभाने से ज्यादा सेवा भावना से काम कर रहें हैं.

First published: September 7, 2017

Source | hindinews18

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