जज्बे को सलाम: फ्री में कोचिंग पढ़ा गरीब छात्रों का जीवन संवार रहा ये दंपति

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जज्बे को सलाम: फ्री में कोचिंग पढ़ा गरीब छात्रों का जीवन संवार रहा ये दंपति

सांकेतिक तस्वीर (Getty Images)

भाषा Updated: September 4, 2017, 11:49 PM IST
राजस्थान के दौसा जिले के एक दंपति गरीब छात्रों के लिए किसी भगवान से कम नहीं हैं. इस दंपति ने सैकड़ों विद्यार्थियों को निशुल्क प्रतियोगी कोचिंग देकर उन्हें बैंक, पुलिस और अध्यापन के क्षेत्र में रोजगार दिलवाया है.

सरकारी विद्यालय के शिक्षक 41 वर्षीय विनोद मीणा और उनकी पत्नी 39 वर्षीय सीमा पिछले छह वर्षों से युवक-युवतियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये निशुल्क कोचिंग देकर उनके सपनों को साकार करने का काम कर रहे हैं.

देश में पांच सितम्बर को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो देश के दूसरे राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है. मीणा दंपति का सराहनीय प्रयास क्षेत्र के गरीब और बेसहारा विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग उपलब्ध करवा कर उनका भविष्य उज्ज्वल बनाने में मददगार साबित हो रहा है. ‘सुपर 30’ की तर्ज पर मीणा दंपति 60 विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं.

विनोद मीणा ने बताया कि तीन बार भारतीय प्रशासनिक सेवा के साक्षात्कार में विफल होने के बाद उन्होंने अपने ज्ञान को क्षेत्र के गरीब और वंचित विद्यार्थियों के साथ साझा करने का निर्णय लिया, ताकि ऐसे विद्यार्थी जिनके परिजन प्रतियोगी कोचिंग की खर्च वहन नहीं कर सकते, उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल करवा कर उनके सपने साकार हो सकें.उन्होंने बताया कि वे और उनकी पत्नी अपनी मासिक वेतन में से औसतन बीस हजार रुपये प्रतिमाह कोचिंग संस्थान का किराया और स्टेशनरी के लिये उपलब्ध कराते हैं. किसी भी भर्ती की तैयारी के लिये 60 विद्यार्थियों के एक बैच का चयन कर उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराई जाती है, जिन्हें रविवार को छोड़कर प्रतिदिन चार घंटे तक कोचिंग दी जाती है. हमारी कोचिंग संस्थान से अब तक करीब 300 विद्यार्थियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है.

मीणा की पत्नी सीमा ने बताया कि जब हमने क्षेत्र के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क कोचिंग देने का निर्णय किया तब लोगों ने हमें हतोत्साहित करने का प्रयास किया लेकिन लोगों के हर बयान से हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली. हमने कोचिंग क्लासेस को पंजीकृत नहीं किया है और ना ही इसे कोई स्वयंसेवी संस्थान बनाने का इरादा है.

अपनी स्वेच्छा से निशुल्क कोचिंग दे रहे चंद्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि मीणा दंपति के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयासों को देखते हुए उन्होंने भी अपना योगदान देना शुरू किया. वह विद्यार्थियों को प्रतिदिन एक घंटें कोचिंग देते हैं. एक अन्य शिक्षक मनमोहन ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सामान्य ज्ञान की तैयारी कराने में मदद करता हूं.

इधर, मीणा दंपति के प्रयासों से निशुल्क कोचिंग के जरिये सरकारी नौकरी प्राप्त कर चुके भारतीय सेना के जवान अजीत सिंह गुर्जर ने बताया कि आदिवासी इलाके में उनके जैसे ऐसे कई लोग है जो कोचिंग क्लासेस का खर्च वहन नहीं कर सकते. दंपति के प्रयासों से उनकी जिंदगी बन गई. यह मानवता की सच्ची सेवा है.

कोचिंग के जरिये सरकारी अध्यापक की नौकरी पाने वाले एक अन्य निशू सिंह ने बताया कि कोचिंग के जरिये प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने बहुत आसान तरीके बताये जाते हैं, जिससे सफलता मिल जाती है. दोनों के सहयोग के बिना यह संभव नहीं था.

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First published: September 4, 2017

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