‘कूड़े का पहाड़ गिरा, पास से गुज़र रहे लोग नाले में गिरे’

Browse By

ग़ाज़ीपुरइमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption ग़ाज़ीपुर में घटनास्थल का एक दृश्य

पूर्वी दिल्ली के ग़ाज़ीपुर इलाके में ‘कूड़े का पहाड़’ वहां से ग़ुजरने वाले लोगों के लिए कोई अजूबा नहीं है. लेकिन इससे शुक्रवार को इतना बड़ा हादसा हो सकता था इसका अनुमान नहीं था.

ग़ाज़ीपुर में कूड़े के डलावघर बनाई गई जगह ने अब पहाड़ का रूप ले लिया है. जिसके ढहने से दो लोगों की मौत हो गई और 5 लोग घायल हो गए. मृतकों में एक युवती भी शामिल है.

इस पहाड़ के इर्द-गिर्द कोंडली, ग़ाज़ीपुर गांव और मुल्ला कालॉनी जैसे इलाके हैं. यह दुर्घटना जिस जगह हुई वह मुल्ला कॉलोनी के सामने था और उसके आगे से दो नहरें बहती हैं जिन्होंने अब लगभग नाले का रूप ले लिया है.

प्रशासन का कहना है कि पहाड़ के बगल वाले कच्चे रास्ते से आम लोगों का जाना प्रतिबंधित है और दो नालों के बीचों-बीच वाले रास्ते से लोगों और वाहनों की आवाजाही होती है.

दिल्ली के गाज़ीपुर में कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा गिरा

Image caption मुन्नी ख़ातून ने ख़ुद देखा यह हादसा

‘हम कॉलोनी की गलियों में भागने लगे’

एक प्रत्यक्षदर्शी मुन्नी ख़ातून बताती हैं कि वह अपने घर के सामने बैठी थीं, तभी पहाड़ का एक हिस्सा नाले में गिरा फ़िर उससे निकले पानी ने बगल वाली सड़क पर चल रहे वाहनों को अपनी चपेट में लेकर दूसरे नाले में फेंक दिया.

मुन्नी कहती हैं, “पहाड़ के गिरते ही अंधेरा छा गया था. इसके बाद रिहायशी इलाके की तरफ़ लगी हुई जालियां भी टूट गईं. उधर से कार, मोटरसाइकिल और स्कूटी पर जा रहे लोग नाले में जा गिरे. इसके बाद कॉलोनी के लोगों ने रस्से डालकर लोगों को नाले से बाहर निकाला.”

लोगों को बचाने वालों में मुन्नी के दामाद भी शामिल थे. वह कहती हैं कि जब यह घटना घटी तब इलाके के लोग डर के कारण कॉलोनी के अंदर गलियों में भागने लगे ताकि पहाड़ उनके घरों तक न गिर जाए.

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ़) के इंस्पेक्टर और बचाव कार्य का निरीक्षण कर रहे पवन कुमार यादव कहते हैं कि नाले के बगल वाले कच्चे रास्ते पर लोगों के नाले में फंसे होने की कम संभावना है. वहीं, मुन्नी कहती हैं कि वह लोगों का आम रास्ता था जिसके कारण वहां लोग फंसे हो सकते हैं.

‘चीनी सेना को हिलाना पहाड़ हिलाने से भी कठिन’

Image caption हाजी शहाबुद्दीन

‘नाले का पानी घरों तक आ गया’

इस हादसे को देखने वाले हाजी शहाबुद्दीन बताते हैं कि पहाड़ में एक धमाका-सा हुआ जिसके बाद अंधेरा-सा छा गया और दो नालों को पार करते हुए पानी घरों के सामने तक आ गया और बचाव दल करीब एक घंटे बाद आया, उससे पहले उन्होंने ही घायलों को बचाया.

कोंडली इलाके के रहने वाले रमाजीत कुमार कहते हैं कि ऐसा हादसा पहले भी हो चुका है जिसके कारण पहाड़ के बगल वाले कच्चे रास्ते को बंद कर दिया गया था.

रमाजीत कहते हैं, “आस-पास मुर्गा और मछली मंडी है. इसमें काम करने वाले लोग इस रास्ते से निकलकर जाते हैं. इस पहाड़ से पहले भी गैस रिसने के कारण धमाके होते रहे हैं और बारिश होने के बाद इस बार बड़ा हादसा हो गया.”

कहां से गिरे जो पहाड़ पर अटके!

Image caption रमाजीत कुमार

प्रशासन जहां दो लोगों के मौत की बात कह रहा है. वहीं, स्थानीय निवासी कह रहे हैं मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती है.

जितेंद्र कहते हैं कि कच्ची सड़क वाले इलाके में जहां पहले नाले में सबसे अधिक कूड़ा गिरा है उसके नीचे अधिक लोग हो सकते हैं क्योंकि वहां से पैदल यात्री और कूड़ा इकट्ठा करने वाले लोग भी जाते हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption घटनास्थल की एक तस्वीर

‘पहाड़ की बढ़ रही है ऊंचाई’

हादसे के अलावा ग़ाज़ीपुर के आसपास के लोग इस पहाड़ से ख़ुद को त्रस्त बताते हैं. मुल्ला कॉलोनी के मोहम्मद ज़फ़र बताते हैं कि बदबू तो इस इलाके के लिए आम बात हो चुकी है लेकिन इस डलावघर की ऊंचाई लगातार बढ़ाई जा रही है.

वह कहते हैं कि प्रशासन के अनुसार इसकी ऊंचाई 25 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए जबकि यह करीब 40 मीटर से अधिक हो चुकी है और कूड़ा कम करने के लिए इसमें आग भी लगाई जाती है.

इस घटना में हताहतों की कुल संख्या कहां तक पहुंचेगी यह तो मालूम नहीं है लेकिन अंधेरा होने के बाद दिल्ली सरकार के डिज़ास्टर मैनेजमेंट और एनडीआरएफ़ ने बचाव और राहत कार्य रोक दिया था. यह बचाव कार्य वापस दिन में शुरू किया जाएगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Source | BBC

%d bloggers like this: