ओलावृष्टि से हुई बर्बादी का मंजर देख सिहर उठे किसान | livehindustan – Insta India

ओलावृष्टि से हुई बर्बादी का मंजर देख सिहर उठे किसान | livehindustan

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बारिश और ओलावृष्टि से करीब करीब सभी फसलों को भारी क्षति हुई है। लेकिन इस दैवीय आपदा से सबसे अधिक तिलहन और दलहन फसलों की बर्बादी हुई है।

ओलावृष्टि से हुई बर्बादी का मंजर देख किसान सिहर उठे। बर्बादी का मंजर ऐसा कि किसान न घर में बैठ पा रहे है न ही खेतों में बर्बाद फसल को देख पा रहे है। आपदा से हुई क्षति के लिए मदद को किसान अब शासन और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए हुए है।

बीते दिनों बारिश तो समूचे जनपद में हुई लेकिन ओलावृष्टि का कहर एक बेल्ट तक ही सिमटा रहा यही जनपद के लिए गनीमत रही। आसमान से बरसी आफत इस कदर भयावह रही कि गांव में टीन और खपरैल तक सुरक्षित नहीं रहे। खेतों में पकी फसल पूरी तरह बिछ गई। अब जिला प्रशासन की सरकारी मशीनरी चौतरफा किसानों की फसलों की क्षति का आंकलन करने में जुटे हुए है। किसानों के ऊपर आई इस आफत में जनप्रतिनिधि भी क्षेत्रों का भ्रमण कर किसानों का दर्द जानने का प्रयास कर रहे है। लेकिन किसान इस आपदा से पूरी तरह से टूट चुका है। जिस तरह ओलावृष्टि और बारिश हुई है किसान बीते वर्ष 2014 व 2015 में हुई ओलावृष्टि की तरह मान रहे है। महुआ के देवीदयाल किसान का कहना है कि इस आपदा से पूरी तरह उनकी फसल बर्बाद हो चुकी है। अब जो भी फसलें बची हुई है उनका उत्पादन अच्छा नहीं मिल पाएगा। खुरहण्ड गांव के शिव सिंह किसान का कहना है कि अब तो इस क्षति का प्रशासन सही आंकलन कर शासन को रिपोर्ट भेजे जिससे उन्हें क्षर्तिपूर्ति मदद मिल सके।

एडीएम ने ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का लिया जायजा

अपर जिलाधिकारी गंगाराम गुप्ता ने महुआ, खुरहण्ड, छिबांव आदि गांव का दौरा किया। ओलावृष्टि और बारिश से जनधन की हुई हानि का सर्वे किया। खेतों में पहुंचकर किसानों की बर्बाद फसलों को देखा। कहा कि सभी तहसीलों को ओलावृष्टि और बारिश से बर्बाद फसलों के आंकलन को लेकर निर्देश दिए जा चुके है। प्रत्येक गांव में राजस्व कर्मी जाकर बर्बाद हुई फसलों की रिपोर्ट तैयार करेंगे। शासन की मंशानुरुप हर संभव उनकी मदद की जाएगी।

सर्वे टीम ने पैलानी तहसील के गांव की फसलों का किया सर्वे

जिला कृषि अधिकारी बाल गोविन्द यादव और पैलानी तहसीलदार व बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि ने पैलानी तहसील के अंतर्गत करीब एक दर्जन से अधिक गांव की फसलों को देखा। कृषि अधिकारी ने बताया कि खप्टिहाकला, अलोना, साड़ी, खैरेई, निबाईच, सिकहुला, पिपरहरी, कुकुवाखास, पैलानी, कानाखेरा, चिल्ला, तारा, सादीमदनपुर, पदारथपुर, अतराहट, मरझा, पडेरी, सिंधनकला, जसपुरा, बड़ागांव आदि गांव के किसानों की फसलों का सर्वे किया गया। साथ ही किसानों से भी जानकारी प्राप्त की गई। सर्वे टीम का दावा है कि यहां पर ओलावृष्टि नहीं हुई है। थोड़ा बहुत बारिश से जरुर फसल प्रभावित हुई है। शेष गांव में राजस्व कर्मी आंकलन में जुटे हुए है।

ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का एसडीएम ने किया सर्वे

उप जिलाधिकारी अतर्रा प्रहलाद सिंह ने ग्राम पुनाहुर, चंद्रावल, सिकलोढी, अमवा और बिसण्डा ग्रामीण गांव के किसानों के खेतों में जाकर ओलावृष्टि और बारिश से बर्बाद फसलों का सर्वे किया। एसडीएम ने निरीक्षण के दौरान कहा कि चना, मसूर, सरसों की फसलों की क्षति हुई है। किसानों ने अपना दर्द अधिकारी को सुनाया। अश्वासन दिया कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी। एसडीएम ने बताया कि जिन फसलों में फलियां आ चुकी थी या फूल निकल रहे थे उन फसलों को अधिक नुकसान हुआ है। करीब 20 से 70 फीसदी तक फसलों की क्षति हुई है।

ओलावृष्टि से 50 से 80 फीसदी फसल बर्बाद

सदर तहसीलदार अपने कर्मचारियों के साथ करीब एक दर्जन गांव का भ्रमण कर ओलावृष्टि और बारिश से बर्बाद फसलों का जायजा लिया। तहसीलदार ने बताया कि गंछा, सुहाना, बांधापुरवा, पडुई, कॅुवरपुर, रेउना, डिंगवाही आदि गांव में ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों को देखा गया। जहां पर अलग अलग फसलों में क्षति का आंकलन किया गया है। बताया कि 50 से 80 फीसदी तक इस आपदा से फसलों की क्षति हुई है। बताया कि प्रत्येक गांव के लिए दो दो अतिरिक्त लेखपाल लगाकर सर्वे कराया जा रहा है। जिससे कि सही आंकलन किया जा सके।