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कैंपस के गणित में वायवा, कॉलेज में नहींकैंपस के गणित में वायवा, कॉलेज में नहीं
-बोर्ड ऑफ स्टडीज में पास हो चुका है वायवा का प्रस्ताव -रुविवि के एमएससी एप्लाइड मैथ में

जागरण संवाददाता, बरेली : रुहेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस के एमएससी अप्लाइड मैथ कोर्स में वायवा (मौखिक परीक्षा) की व्यवस्था है, जबकि डिग्री कॉलेजों के एमएससी गणित पाठ्यक्रम के छात्रों को वायवा का हक नहीं है। ऐसा तब है, जब मैथ की बोर्ड ऑफ स्टडीज एमएससी में वायवा कराने का प्रस्ताव दूसरी बार पास कर चुकी है। विवि और कॉलेज की गणित पर दोहरे नियम को शिक्षक छात्रों के साथ भेदभाव मानते हैं।

बरेली कॉलेज में मैथ के एचओडी डॉ. स्वदेश सिंह मेरठ, कानपुर विश्वविद्यालयों का हवाला देकर कहते हैं कि वहां एमएससी में वायवा होता है। अगर रुविवि के एमएससी मैथ कोर्स में वायवा होगा तो इससे छात्रों का लाभ होगा। डॉ. वीपी सिंह कहते हैं गणित के सभी शिक्षक वायवा के पक्षधर हैं। विवि प्रशासन को इसे मंजूरी देनी चाहिए। मैथ की बोर्ड ऑफ स्टडीज के कन्वीनर एसएम डिग्री कॉलेज चंदौसी के एसोसिएट प्रो. डॉ. सतीश वाष्र्णेय कहते हैं कि दूसरे विश्वविद्यालयों के साथ कैंपस में भी वायवा को शामिल किया जा चुका है तो यहां भी अनुमति मिलनी चाहिए, वरना संबद्ध कॉलेजों के छात्र दूसरे विश्वविद्यालयों की अपेक्षा स्को¨रग में पिछड़ जाएंगे। हालांकि वो ये भी जोड़ते हैं कि वायवा की मांग कई सालों से उठ रही है।

वायवा में ढालें पांचवां पेपर

-डॉ. स्वदेश सिंह ने कहा कि एमएससी मैथ में पांच विषय होते हैं। चार पेपर लिखित हों जबकि पांचवा पेपर वायवा का किया जाए।

एडवांस है कैंपस की एमएससी

रुविवि में साइंस के एक एसोसिएट प्रोफेसर कहते हैं कि एमएससी अप्लाइड मैथ सामान्य एमएससी की अपेक्षा थोड़ी एडवांस है। कैंपस की बोर्ड ऑफ स्टडीज भी अलग होती है।

फ‌र्स्ट डिविजन मुश्किल

मैथ के एक शिक्षक कहते हैं कि गत वर्ष बड़ी संख्या में छात्रों को मैथ में पास होने के लाले पड़ गए थे। स्थिति ये रही कि इंप्रूवमेंट का सहारा लेना पड़ा तो अधिकांश सेकेंड डिविजन पर ही अटक गए, जबकि दूसरे कॉलेजों में वायवा होता है। वहां छात्रों को अच्छे अंक मिल जाते हैं।

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बोर्ड ऑफ स्टडीज के अलावा कार्यपरिषद की बैठक से प्रस्ताव पास होना जरूरी है। अगर नियमानुसार ये प्रस्ताव आगे बढ़ा है और बदलाव संभव है, तो इस पर विचार होगा।

-प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति रुविवि

By Jagran

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