नंबर-१ बनने के लिए इंदौर से सीख लेकर आए अफसर, बुरहानपुर में अपनाना भूले | patrika – Insta India

नंबर-१ बनने के लिए इंदौर से सीख लेकर आए अफसर, बुरहानपुर में अपनाना भूले | patrika

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बुरहानपुर. स्वच्छता सर्वेक्षण २०१८ में हर अंक जहां प्रतिस्पर्धा में शहरों की स्थिति को सुधार सकता है, तो वहीं नगर के जिम्मेदार इसे लेकर लापरवाह बने हुए हैं।

२०१७ में सफाई में नंबर वन बने इंदौर से सीख लेने के लिए बुरहानपुर से अफसरों का दल यहां सब देखकर तो आ गए, लेकिन इनसे सीखा नहीं। अब भी खुले में कचरा फेंक रहे हैं, तो कम्पोजिंग खाद का भी ठिकाना नहीं है।

स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत अन्य शहरों में एक्सपोजर विजिट व कार्यशालाओं में शामिल होने के लिए हर निकाय को अपने अफसरा-कर्मचारियों को भेजा था, इसके लिए १६ अंक निर्धारित है। मकसद ये था कि उन शहरों के अच्छे कामों से सीख लेकर खुद के निकाय में उसे अपनाया जाए और आगे बढ़ा जा सके, लेकिन नगर निगम बुरहानपुर ने इस पर कुछ भी अमल नहीं किया।

इंदौर में रहकर लौटे अफसर-कर्मी

अफसर-कर्मी बहुत कुछ देखकर तो आ गए, लेकिन यहां की व्यवस्था और संसाधन के आगे उनका सीखा धरा रह गया। बड़ी बात तो यह थी कि अब तक शहर में खुले में कचरा तक फेंकना नहीं बंद हुआ। एक काम जरूर इनके काम आया वह था दिन और रात्रि कालीन सफाई व्यवस्था, जो शहर में रात्रिकालीन सफाई की जा रही है। इंदौर के लिए बुरहानपुर से स्वास्थ्य अधिकारी मोहन सोलंकी, उपेंद्र गुजराती और कालू जंगाले इंदौर गए थे।

यह सीख ले सकते थे इंदौर से

इंदौर में प्लास्टिक वेस्टका सही उपयोग, ब्रिक्स व कुशन बनाना, रात की सफाई, ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन, निर्माल्य से खाद बनाना व अमले का आपसी सामंज्स बेहतर करना। यह बहुत जरूरी है।

ये बोले अफसर

स्वास्थ्य अधिकारी मोहन सोलंकी ने कहा कि इंदौर में फूलों की खाद बनाने का काम बेहतर है।इसके अलावा प्लास्टिक प्रबंधन भी देखने को मिला, जहां पन्नियों को गलाकर इसके पाइप बनाए जाते हैं। यह सब तो अफसरों ने देखा लेकिन बुरहानपुर में अब तक कम्पोस्ट खाद बनाने का काम भी शुरू नहीं हुआ। ट्रेचिंग ग्राउंडपर केवल चार फीट की दीवार बनानकर छोड़ दिया।

ये कारण घटाएंगे नंबर

ठोस अपशिष्ठ का उचित निपटान, प्लास्टिक प्रबंधन, ट्रेचिंग ग्राउंड पर यूनिट लगाकर कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाना, रहवासी क्षेत्रों में डस्टबिन न होना

बंद नहीं हुई ये प्रथा

शहर में अब भी खुले में कचरा फेंकने की प्रथा बंद नहीं हुईहै। न ही निगम इस पर नियंत्रण कर सका है।कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां रोडकिनारे कचरा घर बना दिया है। यह नजारे प्रतापपुरा, शिकरापुरा आदि क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं।

यह सुधार भी हुआ

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन

व्यक्ति शौचालय का निर्माण

शहर पूरी तरह ओडीएफ

जागरुकता कार्यक्रम

हम इंदौर दौरा करने गए थे, दो दिन यहां रहे और बहुत कुछ यहां देखने-सीखने को मिला। इसे बुरहानपुर में भी अपना रहे हैं। – मोहनलाल सोलंकी, स्वास्थ्य अधिकारी ननि