ग्राउंड रिपोर्ट: शंभूलाल रैगर कैसे बन गए शंभू भवानी – Insta India

ग्राउंड रिपोर्ट: शंभूलाल रैगर कैसे बन गए शंभू भवानी

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शंभूलाल
Image caption शंभूलाल की छोटी बेटी मानसिक रूप से बीमार है. शंभूलाल के जो वीडियो वायरल हुए हैं उनमें ये बेटी भी दिख रही है

राजस्थान के राजसमंद ज़िले के कलालवटी रैगर मुहल्ले में शंभूलाल रेगर के घर का दरवाज़ा बंद है. कई बार आवाज़ देने पर भी कोई बाहर नहीं निकलता. मैं वहीं खड़ा रहता हूं.

थोड़ी देर में शंभूलाल की मानसिक रूप से कमज़ोर बेटी बाहर आती है और मेरे हाथ में माइक देखकर उत्सुकतावश वो उसके बारे में पूछने लगती है. वो माइक हाथ में लेकर बाल कविताएं गाने लगती है.

अब तक वायरल हो चुके वीडियोज़ में ये छोटी बच्ची लगातार अपने पिता शंभूलाल रैगर की बगल में बैठी नज़र आती है. तब भी जब शंभूलाल हिंदुओं को “इस्लामी जिहादियों के ख़िलाफ़ एकजुट होने” का संदेश वीडियो पर रिकॉर्ड कर रहे होते हैं.

ऐसे ही वीडियो में शंभूलाल बंगाल से मज़दूरी करने राजसमंद आए अफ़राजुल के पीछे से उन पर गैंती से हमला करते हुए दिखते हैं और बाद में वीडियो संदेश में ही कहते हैं,’ मुझे जो समझ में आया कर दिया, अच्छा किया या ग़लत किया.’

शंभूलाल कहते हैं, “मैं एक जिहादी को उसके अंजाम तक पहुंचा रहा हूं. मुझे पता है विरोधी राजनीति वाले मुझे आतंकवादी और देशद्रोही बना देंगे. मैं अपने ख़ुशहाल परिवार को दुखी कर रहा हूं. मुझे देश में आतंकवादी हमले में मरने वाले लोगों में मान लिया जाए.”

दिल्ली से क़रीब छह सौ किलोमीटर दूर राजस्थान का राजसमंद क़स्बा संगमरमर की खदानों, श्री द्वारकेश्वर मंदिर और उससे लगी सुंदर झील के लिए जाना जाता है. शहर के चौराहों पर भगवा ध्वज फहराते नज़र आते हैं और स्थानीय लोग कहते हैं कि शहर में मंदिरों की अधिकता के कारण जगह-जगह पर भगवा झंडे दिखते हैं.

Image caption राजसमंद झील के किनारे बसा राजसमंद एक सुंदर और शांत शहर है

स्मार्टफ़ोन पर वीडियो

क़स्बे की गलियों-गुमटियों में, चाय की दुकानों पर और चौराहों पर बैठे लगभग हर नौजवान के पास स्मार्टफ़ोन नज़र आता है. हाल ही में इंटरनेट डेटा की क़ीमत कम होने के कारण वो सोशल मीडिया पर फैलने वाले वीडियो देखते हैं और शेयर करते हैं. इनमें से ज़्यादातर गाय-बछड़े काटे जाने या “हिंदुओं पर ज़्यादतियों” के दूसरे भड़काऊ वीडियो होते हैं.

मुखर्जी चौराहे पर दोनों कानों में बुंदे पहने हाथ में स्मार्टफ़ोन लिए दाढ़ी वाले एक नौजवान ने इस संवाददाता को एक वीडियो दिखाया जिसमें एक बछड़े को काटते हुए दिखाया गया था. जब उसे बताया गया कि ये वीडियो पाकिस्तान का है तो उसने कहा, “हम ये सब देखते हैं. हम आज ये युवा छोरे हैं. हमारा भी ख़ून खौलता है.”

Image caption राजसमंद के युवाओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने वाले भड़काऊ वीडियो उन्हें उत्तेजित करते हैं और उनके दिल में मुसलमानों के प्रति नफ़रत पैदा होती है

शंभुलाल रैगर भी इन्हीं नौजवानों में से एक थे. हिंदुत्व के प्रति उनकी भावनाएँ भी आराम से उपलब्ध होने वाले ऐसे ही भड़काऊ वीडियो देख-देख कर ही भड़की थीं.

सोशल मीडिया रिवोल्यूशन के बाद अब किसी कार्यकर्ता को घर-घर जाकर लोगों को धर्म के नाम पर एकजुट करने की ज़रूरत नहीं पड़ती. सिर्फ़ एक वीडियो को व्हाट्सऐप या फ़ेसबुक पर डाल देने भर से मक़सद पूरा हो जाता है.

बेरोज़गारी में गांजा पी रहे थे शंभू

शंभू के बहनोई ने बताया कि एक-दो साल से उनका काम-धंधा बहुत अच्छा नहीं चल रहा था. वो बहुत ज़्यादा गांजा पीने लगे थे. मोबाइल का इस्तेमाल भी बहुत ज़्यादा कर रहे थे. वो कहते हैं, “काम धंधा न चलने से वो परेशान थे. मोबाइल पर वीडियो भी देखते थे.”

आसपास के लोगों का भी यही कहना था कि शंभू करीब एक साल से बेरोज़गार थे. उनकी पत्नी मीडिया को दिए एक बयान में इस बात की पुष्टि कर चुकी हैं.

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Image caption राजसमंद के कई लोगों की नज़र में शंभू एक हीरो हैं जिन्होंने बहन-बेटियों की इज़्ज़त के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया है

इन युवाओं पर सोशल मीडिया का प्रभाव साफ़ नज़र आ रहा था. राजस्थान के गृहंत्री गुलाब चंद कटारिया से जब सोशल मीडिया की भूमिका के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “जो ग़लती करेगा क़ानून उसे सज़ा देगा चाहे वो किसी भी धर्म और संप्रदाय से हो. हमने राजस्थान में हर मामले में अपराधियों को पकड़ा है. सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार ही फ़ैसला ले सकती है. केंद्र सरकार ही इसे लेकर कोई नया क़ानून ला सकती है. जो मौजूदा क़ानून हैं हम उसके तहत कार्रवाई कर रहे हैं.”

उदयपुर दैनिक भास्कर के संपादक त्रिभुवन कहते हैं, “पिछले साल भर से सोशल मीडिया इस्तेमाल में इंटरनेट सस्ता होने की वजह से तेज़ी आई है. लोग जब धर्म और सांप्रदायिकता में रंगे हुए वीडियो देखते हैं तब उनका दिमाग विचलित हो जाता है.”

त्रिभुवन कहते हैं, “बीते एक साल में राजस्थान में निचले तबके या कम आमदनी वाले वर्ग में बेरोज़गारी बढ़ी है. बीस साल से 35-40 साल के वो लोग जिन्हें काम नहीं मिल पा रहा है वो खाली समय में वीडियो ही देख रहे हैं. बेरोज़गारी और निराशा के वातावरण में जब उन्माद की छौंक लगती है तो लोग विचलित हो जाते हैं, संयम नहीं रख पाते और फ़र्ज़ी ख़बरों के शिकार हो जाते हैं. मुझे लगता है कि राजसमंद हत्याकांड करने वाले व्यक्ति पर भी सोशल मीडिया का प्रभाव रहा होगा.”

Image caption शंभू के बहनोई ने बताया कि एक-दो साल से उनका काम धंधा बहुत अच्छा नहीं चल रहा था. वो लगभग बेरोज़गार थे.

‘हमारा शंभू ऐसा नहीं है’

पर शंभूलाल को जानने वालों के लिए ये यक़ीन कर पाना मुश्किल हो रहा है कि जिस आदमी ने कभी किसी को थप्पड़ तक नहीं मारा हो उसने कैसे सरेआम गैंती से अफ़राजुल की हत्या का वीडियो रिकॉर्ड करवाया होगा.

पड़ोस के घर से एक बूढ़ी औरत निकलती हैं और कहती हैं, “हमारा शंभू ऐसा नहीं था, पता नहीं उसने क्यों ऐसा कर दिया. जो उसने किया उसे देखकर यक़ीन नहीं होता कि ये हमारा ही शंभू है.” शंभू उन्हीं के सामने पैदा और बड़े हुए. उन्हें ऐसी कोई घटना याद नहीं आती जब शंभू ने हिंसक व्यवहार किया हो.

दैनिक भास्कर को दिए एक साक्षात्कार शंभू की मां ने कहा है, “मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता, उसने तो कभी किसी को थप्पड़ भी नहीं मारा, उसे ज़रूर किसी ने उकसाया होगा.”

शंभू की मां ने कहा, “जिसने कभी किसी को एक थप्पड़ तक ना मारा हो वो बिना किसी के उकसाए हत्या कैसे कर सकता है? क़ानून शंभू को सज़ा देगा, लेकिन उन लोगों को भी सज़ा मिलनी चाहिए जिन्होंने उसे उकसाया है. वो भी हत्या में भागीदार हैं.”

Image caption दलित युवाओं के ग्रुप में शेयर की जा रही तस्वीरें

‘प्रतिशोध’ में भरे हुए शंभूलाल की झलक उनके वीडियो और, ख़ास तौर पर उस लिखित नोट में ज़रूर दिखती है जो उन्होंने फ़ेसबुक पर पोस्ट किया है.

इसमें उन्होंने उन तमाम मुद्दों को उठाया है जिन्हें पिछले कुछ बरसों से भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उठाते रहे हैं- ‘मुसलमान इस्लामिक जिहाद करते हैं, लव जिहाद के ज़रिए हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाते हैं, भारत के ख़िलाफ़ आतंकवाद फैलाते हैं, चार शादियाँ करते हैं और जनसंख्या बढ़ाने के लिए अधिक बच्चे पैदा करते हैं.’

फ़ेसबुक पर पोस्ट किए एक लेख में शंभू ने कहा है, “इस्लामी जिहाद दुनियाभर में फैल गया है और अब इसे रोकना ही होगा. लव जिहाद की बेड़ियों में जकड़ी लड़कियों को छुड़ाने के लिए मुझे अपना अहिंसक जीवन समाप्त करना ही होगा.”

अटपटी बात ये है कि शंभूलाल ने वो नोट देवनागरी लिपि का इस्तेमाल करते हुए अंग्रेज़ी भाषा में लिखा है. उदयपुर के पुलिस महानिरीक्षक आनंद श्रीवास्तव का कहना है कि ये नोट घटना से क़रीब दस दिन पहले लिखा था. पुलिस के मुताबिक शंभू ने अक्तूबर 2016 में स्मार्टफ़ोन ख़रीदा था और उस पर गूगल के ज़रिए भाषा ट्रांस्लेशन का अभ्यास वो करते रहे थे.

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Image caption शंभू की गिरफ़्तारी से जुड़े रहे एक पुलिस सूत्र ने बताया कि गिरफ़्तारी के बाद शंभू को कोई अफ़सोस नहीं था

‘लव जिहाद होता है’

शंभूलाल ने जो किया उसका वीडियो रैगर मोहल्ले के सब लोग देख चुके हैं. लोग कहते हैं कि शंभू ने जो किया ग़लत किया लेकिन….?

असली बात इस लेकिन के बाद ही शुरू होती है. यहां रहने वाले तमाम नौजवानों को पक्का यक़ीन है कि लव जिहाद एक वास्तविक समस्या है और इससे निबटना ज़रूरी है. वो बार-बार एक लड़की का ज़िक्र करते हैं जो कई साल पहले एक बंगाली मज़दूर के साथ मालदा चली गई थी और जिसे वापस लाने के लिए शंभू पश्चिम बंगाल गए थे.

रविवार को शंभूलाल का एक और वीडियो वायरल हुआ है. ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्रीराम’ के साथ शुरू हुए इस वीडियो में वो उस लड़की को पश्चिम बंगाल से ‘जिहादियों के चंगुल से छुड़ाकर लाने का दावा कर रहे हैं. ‘

शंभू ने वीडियो में दावा किया है,”लड़की को प्रताड़ित किया गया, इस्लाम अपनाने पर मज़बूर किया गया.” हालांकि बीबीसी से बातचीत में इस लड़की ने शंभू के दावों को खारिज किया है.

उस लड़की ने बीबीसी से कहा, ”मेरा शंभू से कोई लेना-देना नहीं हैं. मेरा किसी से कोई लेना-देना नहीं है, मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया जाए. मैं शंभू के साथ वापस नहीं आई थी. शंभू मेरी मां से पैसे लेकर मुझे लेने पश्चिम बंगाल गए थे, लेकिन मैं उनके साथ नहीं आई थी, मैं दस-पंद्रह दिन बाद लौटी थी. ये कई साल पुरानी बात है. मैं तब सिर्फ़ तेरह साल की थी जब वो मुझे ले गए थे. उन्होंने बंगाल में मुझे अच्छे से रखा था. मेरे साथ कुछ बुरा नहीं किया गया. मुझे वहां एहसास हुआ कि मैं अपने परिवार से दूर नहीं रह सकती हूं इसलिए मैं अपनी मर्ज़ी से वापस आ गई. “

Image caption राजसमंद का कलालवटी रैगर मोहल्ला जहां रैगर और खटीक समुदाय के लोग रहते हैं. ये समुदाय दलित वर्ग में आते हैं.

अफ़राजुल की हत्या से पहले रिकॉर्ड किए गए शंभूलाल के अब तक कई वीडियो वायरल हुए हैं. इन वीडियों में शंभू ने कहा है, “हमें अपने सारे जाति बंधन तोड़कर आरक्षण के लिए लड़ने के बजाए संगठित हिंदुत्व की शक्ति बनाकर हमारे देश से जिहाद को ख़त्म करना होगा.”

शंभू के मोहल्ले के दलित युवा उनकी बातों से सहमत दिखते हैं. बात ख़त्म होते होते युवाओं का ये समूह ‘जय शंभू भवानी, जय श्रीराम’ का नारा लगाता है.

मैंने कहा कि ‘जय भीम’ का नारा लगाने वाले दलित ‘जय श्रीराम’ कब से कहने लगे तो युवाओं ने कहा, हम ‘जय भीम’ भी हैं, ‘जय श्री राम’ भी, दलित भी और हिंदू भी. एक बार फिर से ‘जय शंभू भवानी’ का नारा गूंज गया.

शंभूलाल के जो वीडियो वायरल हुए हैं उनमें वो लव जिहाद, इस्लामिक आतंकवाद, मुसलमानों के चार पत्नियां रखने, कई बच्चे पैदा करने, कश्मीर में धारा 370 के मुद्दे, कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार, भारत के इस्लामीकरण, वैश्विक आतंकवाद, मुसलमानों के राष्ट्रविरोधी होने, आरक्षण छोड़ने और दलितों के एकजुट होने की बातें कर रहे हैं.

Image caption व्हाट्सएप ग्रुपों पर शेयर की जा रही ऐसी ख़बरें युवाओं में उत्तेजना पैदा करती हैं

शंभू भवानी

शंभूलाल रैगर का फ़ेसबुक पेज ‘शंभू भवानी’ के नाम से हैं. राजसमंद झील के किनारे योग करते हुए तस्वीर उनकी प्रोफ़ाइल पिक्चर है. उनके दाएं बाजू पर एक टैटू है और सीने पर उन्होंने अपनी मानसिक रूप से बीमार बेटी की तस्वीर का टैटू बनवा रखा है.

हाल फिलहाल में उन्होंने भगवा ध्वज के साथ कई तस्वीरें पोस्ट की हैं, लेकिन टाइमलाइन में बहुत पीछे जाने पर कुछ भी उग्र या हिंसा को बढ़ावा देती सामग्री नहीं मिलती. इसका अर्थ ये निकाला जा सकता है कि उन पर कट्टरवादी विचारधारा का गहरा प्रभाव कुछ महीने पहले ही हुआ होगा.

रैगर मोहल्ले के युवा भी शंभूलाल को शंभू भवानी के नाम से ही पुकार रहे थे. शंभू के घर के आसपास ही रहने वाले कैलाश रैगर कहते हैं, “बंगाली मुसलमानों के हमारे मुहल्ले से लड़कियों को ले जाने की घटनाएं हुई हैं. शंभूलाल ने जो किया है बिल्कुल ठीक किया है.”

Image caption स्वच्छ भारत, स्वच्छ राजसमंद नाम के जिस व्हाट्सएप ग्रुप में ये पोस्ट किया गया है उसमें भाजपा सांसद और विधायक समेत शहर के बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी जुड़े हुए हैं

ये सभी युवा आपस में व्हॉट्सऐप पर भी जुड़े हैं. एक युवा ने अपना व्हॉट्सऐप ग्रुप दिखाया. वो ‘शंभू भवानी’ के जयकारों से भरा पड़ा था. योग कर रहे शंभू की तस्वीर के साथ भगवा ध्वजों के बीच में लिखा था ‘जय श्री राम.’

वीर रस की एक कविता भी ग्रुप में पोस्ट की गई थी जिसमें शंभू का गुणगान किया गया है. ग्रुप स्क्रॉल किया तो हिंदूवादी पोस्ट ही अधिकतर दिखे. क्या आप इस तरह की पोस्ट को सही मानते हैं, सभी युवाओं ने एक सुर में कहा, “ये सब हो रहा है तभी तो व्हॉट्सऐप में आ रहा है?”

‘शंभूलाल का समर्थन करने वाले गिरफ़्तार होंगे’

Image caption राजसमंद में व्हाट्सएप ग्रुप में इस तरह की कविताएं शेयर की जा रही हैं

मैंने कलालवटी के रैगर मोहल्ले की कई दलित लड़कियों से भी बात की. ‘लव जिहाद’ शब्द उन्होंने शंभू का वीडियो वायरल होने के बाद पहली बार सुना है. फिर भी वो मानती हैं कि लव जिहाद होता होगा. “अगर लव जिहाद नहीं होता तो शंभू ऐसा क्यों करते?”

हालांकि मोहल्ले के उम्रदराज़ लोगों का कहना था कि शंभू ने जो किया बहुत ग़लत किया. एक बुज़ुर्ग ने कहा, “बुरे काम का बुरा नतीजा.”

मैं रेगर मोहल्ले से वापस लौट ही रहा था कि एक बार फिर शंभू की बेटी ने मुझे रोक लिया. वो फिर से माइक के बारे में जानने को उत्सुक थी. वो फिर से कोई बाल कविता पढ़ना चाहती थी.

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Source | BBC